राजस्थान के बेरोजगारों के लिए बुरी खबर है। अब मध्य प्रदेश भी सरकारी नौकरियों में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों पर पाबंदी की तैयारी कर रहा है। मप्र के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को इसका ऐलान किया। अब तक देश के 15 से अधिक राज्य अलग-अलग कारणों से बाहरी राज्य के अभ्यर्थियों के लिए कई भर्तियों के दरवाजे बंद कर चुके हैं। मगर राजस्थान में खुली छूट है।
भास्कर ने जब बाहरी राज्यों की भर्तियों का अध्ययन किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दूसरे राज्यों ने स्थानीय निवासी होने, स्थानीय भाषा का ज्ञान होने, स्थानीय शिक्षण संस्थानों से पासआउट होने जैसी शर्तें लगाकर राजस्थान के बेरोजगारों के लिए वहां नौकरियों में अड़ंगा लगा रखा है।
पाबंदी क्यों जरूरी है? प्रदेश में अभी एससी के लिए 16%, एसटी के लिए 12%, ओबीसी के लिए 21%, ईडब्ल्यूएस के लिए 10%, एमबीसी के लिए 5% आरक्षण है। बाकी 36% सामान्य वर्ग के कोटे के लिए है। इसी 36% में बाहरी अभ्यर्थी शामिल हैं। ऐसे में प्रदेश के बेरोजगारों के लिए मौके और कम हो जाते हैं।
कैसे मिलती है छूट; सामान्य कोटे में होते हैं शामिल
राजस्थान में बाहरी राज्य के अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के कोटे में शामिल किए जाते हैं। {योग्यता में केवल यह लिखा होता है कि देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी का व्यावहारिक ज्ञान और राजस्थान की संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए। लेकिन भर्तियों में राजस्थान की संस्कृति के ज्ञान के लेवल को जांचने का कोई तरीका ही नहीं अपनाया जाता।
ऐसे कसें शिकंजा; स्थानीय निवासी होने की शर्त हो
- राजस्थान का स्थानीय निवासी होने की अनिवार्यता लागू हो।
- बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों का कोटा फिक्स किया जाए।
- अधिकतम आयुसीमा 40 की जगह 25 या 30 साल करें।
- सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान से 10वीं अनिवार्य हो।
- राजस्थानी इतिहास, संस्कृति, साहित्य आदि के सवाल बढ़ाएं।
- राजस्थानी भाषा के कई सवाल प्रश्न-पत्र में शामिल करें।
शिवराज सिंह के ट्वीट ने छेड़ी बहस
मेरे प्यारे भांजे-भांजियों! आज से मध्य प्रदेश के संसाधनों पर पहला अधिकार मध्य प्रदेश के बच्चों का होगा। सभी शासकीय नौकरियां सिर्फ मध्य प्रदेश के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। हमारा लक्ष्य प्रदेश की प्रतिभाओं को प्रदेश के उत्थान में सम्मिलित करना है।
- शिवराज सिंह चौहान का ट्वीट
इन्होंने भी उठाई आवाज
अगर दूसरे राज्य ऐसे प्रावधान कर रहे हैं तो हमारे यहां भी इसे लागू करना चाहिए। इस पर सीएम को विचार करना चाहिए। मैं इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने का प्रयास करूंगा।
- वासुदेव देवनानी, विधायक व पूर्व शिक्षामंत्री
हम दो साल से संघर्ष कर रहे हैं। हमारी मांग पर सीएम कार्यालय ने कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर इसकी रिपोर्ट तलब की थी। पर कुछ नहीं हुआ।
- उपेन यादव, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान एकीकृत बेरोजगार महासंघ
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