काेराेना के कारण पुष्कर में जलझूलनी एकादशी के मौके पर मंदिरों से गाजे-बाजे के साथ निकाली जाने वाली ठाकुर जी की रेवाड़ियां इस बार नहीं निकली। ठाकुर जी ने पुष्कर सरोवर में जल विहार भी नहीं किया। इसके चलते मुख्य गऊघाट पर सन्नाटा पसरा रहा।
जलझूलनी एकादशी के मौके पर पुष्कर में पाराशर ब्राह्मण, कुमावत, धोबी बसीटा, प्रजापत, वैष्णव, सैन, रेगरान समेत अमूमन सभी समाजों के मंदिरों से समाज बंधु अपने-अपने आराध्य देवों की गाजे-बाजे के साथ धूमधाम से रेवाड़िय़ां निकालते हैं।
सभी रेवाड़िय़ां नगर भ्रमण करते हुए शाम को मुख्य गऊघाट पहुंचती हैं। जहां मेला भरता है तथा श्रद्धालु ठाकुर जी को जल विहार कराते हैं। पूजा-आरती के बाद रेवाड़िय़ां वापस मंदिरों में पहुंचती हैं लेकिन कोविड़-19 की गाइड लाइन व प्रशासनिक पाबंदी के कारण इस बार एक भी समाज के मंदिर से रेवाड़ी नहीं निकाली गई।
सभी मंदिरों में पुजारी परिवार की ओर से पुष्कर सरोवर के जल से ठाकुर जी को स्नान कराया गया तथा पूजा-आरती की गई। इस दौरान मंदिरों में समाज बंधुओं की उपस्थिति भी नगण्य रही। जोगनियां धाम में उपासक भंवरलाल के सानिध्य में जलझूलनी एकादशी का पर्व सादगी से मनाई।
परिवार के सदस्यों ने जयपुर घाट पर माता रानी की प्रतिमा को पुष्कर सरोवर के जल से स्नान कराया तथा आरती उतारी। मंदिर पहुंचने पर प्रसाद वितरित किया गया।
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