सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
नए म्यूटेंट वायरस का असर कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा केवल अप्रेल महीने के 26 दिनों से ही लगाया जा सकता है। पिछले साल अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर व नवंबर 2020 के 122 दिनों में 8621 कोरोना संक्रमित की तुलना में यह संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। संक्रमण के लिहाज से इस साल अप्रेल अब तक का सबसे खतरनाक महीना साबित हो रहा है। जिले में अप्रेल में अब तक कोरोना के 8511 मरीज सामने आ चुके हैं। यह हालात केवल 26 दिनों के हैं। यानी हर रोज औसत 327 कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं। जबकि पिछले साल जब कोरोना अगस्त से नवम्बर माह में अपने पीक पर था, तब संक्रमितों का आंकड़ा हर रोज औसत ७० था। सोमवार को जिले में ७०१ नए रोगी सामने आए जो अब तक के सर्वाधिक आंकड़े है। जिले में अब तक कुल २१ हजार ५२४ कोरोना संक्रमित हो चुके है। पिछले साल के चार महीने में लगभग ६० हजार लोगों की सैंपलिंग हुई। इसमें से ८६२१ की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। दिसम्बर से मार्च आते-आते कोरोना का असर कम हुआ था। लेकिन अप्रेल आते ही हालात और ज्यादा गंभीर होते चले गए। अप्रेल माह के 2६ दिनों में ही कोरोना ने जनजीवन और अस्पताल की व्यवस्थाएं ही बदलकर रख दी। चिकित्सा विभाग ने सैंपलिंग पर फोकस कर रखा। नतीजा इन 2६ दिनों में ८५११ कोरोना के मरीज सामने आ गए। हालात यह हो गए कि अस्पतालों में बेड खाली नहीं है। ऑक्सीजन के लिए लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। जीवनदायिनी माना जाने वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन भी स्टॉक में नहीं बचा है। सोमवार को भीलवाड़ा के सीडीओ कार्यालय के वरिष्ठ सहायक समेत १६ जनों की मौत हो गई है। इनमें ९ जनों की मौत एमजीएच में तथा ७ की निजी चिकित्सालय में हुई है।
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