गांधीनगर. रेमडेसिविर दवाई को लेकर आमजन में गलतफहमियां हैं। रेमडेसिविर चाहने के लिए मरीजों के परिजन घंटों तक लम्बी -लम्बी कतारों में खड़े रहते हैं। यहां तक कि मरीजों को बचाने के लिए परिजन मुंह मांगे दाम तक दे रहे हैं, लेकिन यह दवाइ नहीं मिल रही। कई ऐसे भी किस्से सामने आए, जिसमें रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों पर पुलिस ने शिकंजा कसा। वहीं गुजरात राज्य के टास्क फोर्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय है कि रेमडेसिविर कोविड से होने वाली मौत को नहीं रोक सकती है। इस दवा से कोविड मरीज चाहे सामान्य हो या मध्यम हों उन्हें गंभीर होने से रोका जा सका है ऐसे भी कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
चिकित्सकों की राय है कि भारत सरकार ने रेमडेसिविर दवा को प्रायोगिक दवाओं की श्रेणी में इमरजेंसी उपयोग के लिए मंजूरी दी गई है। यह दवा कोविड के हर मरीजों के लिए जरूरी नहीं है। ऐसे मरीज जिनमें सांस लेने की गति प्रति मिनट 24 से 30 हो और ऑक्सीजन का स्तर 90 प्रतिशत से कम हो और बीमारी के लक्षण पांच से सात दिनों में दिखें हों ऐसे मरीजों में यह दवा कुछ हद तक कारगर हो सकती है। चिकित्सकों की यह भी राय है कि ऐसा भी नहीं है कि यह दवा लेने से अस्पताल में भर्ती मरीज शीघ्र स्वस्थ हो गया हो और उसे अस्पताल से कम दिनों में ही छुट्टी मिल गई हो या मृत्यु दर में कोई कमी या मरीज के शरीर में कोविड वायरस के प्रमाण घटे हों ऐसे कोई भी निश्चित प्रमाण नहीं मिले हैं। जिन मरीजों का ऑक्सीजन का प्रमाण 90 प्रतिशत से कम हो गया हो। इस बीमारी के लक्षण नजर आने के 8 दिनों से पहले दी जा सकती है।
वरिष्ठ संक्रामक रोग विशेषज्ञ एवं स्टेट कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. अतुल पटेल के अनुसार गैरजरूरी तरीके उपयोग और संग्रहखोरी के चलते ही रेमडेसिविर दवा की कमी के हालात बने हैं। देखादेखी, घबराहट और चिकित्सकों की सलाह के बगैर रेमडेसिविर दवा न लें। रेमडेसिविर का उपयोग आपके चिकित्सक की उचित सलाह एवं निगरानी के बगैर न करें। 'रेमडेसिविर कोविड से होनेवाली मौत को नहीं रोक सकती। फिजूल तरीके से उसके पीछे भागदौड़ नहीं करें।
सीनियर डायबिटोलॉजिस्ट एवं स्टेट कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. वी.एन. शाह के मुताबिक 'कोविड के हर मरीज को रेमडेसिविर दवा की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि जब भी किसी मरीज को इस दवा आवश्यकता हो तो चिकित्सक की सलाह पर ही यह दवा लेनी चाहिए।
क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ एवं स्टेट कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. तुषार पटेल के मुताबिक रेमडेसिविर दवा दुष्प्रभाव भी हो सकता है। यह दवा हमेशा अस्पताल में चिकित्सक की निगरानी में ही लेनी चाहिए।
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