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सोमवार, 26 अप्रैल 2021

पुरातन और विज्ञान : ह्यूमैंजी की कल्पना होगी साकार !

प्रमोद भार्गव

पहली बार अमरीका और चीन के वैज्ञानिकों ने मिलकर आदमी और बंदर की स्तंभ कोशिकाओं को मिलाकर एक भू्रण सृजित किया है। इस प्रयोग का उद्देश्य भविष्य में इंसानों के लिए नए अंगों को विकसित करना है, ताकि अंग प्रत्यारोपण में कमी का सामना न करना पड़े। कैलिफोर्निया के साल्क इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल साइंस के प्रो. जुआन कार्लोस और हॉवर्ड विवि के बायोएथिसिस्ट इंसू ह्यून ने इस तरह के प्रयोग में जुटे हैं । उन्होंने मनुष्य की 25 स्तंभ कोशिकाएं बंदर के भू्रण में डाल दी। एक दिन बाद ही इस प्रयोग के नतीजे आश्चर्यजनक रहे। बंदर भू्रण के भीतर इंसान की 132 कोशिकाएं विकसित हो गईं, क्योंकि बंदर और इंसान के जीन में अधिकतम समानता होती है।

भारतीय मिथकों और ग्रीस की लोक-कथाओं में आधा इंसान और आधे जंतु वाले जीवों की कथाएं खूब मिलती हैं। इस कड़ी में विष्णु का अवतार नरसिंह अत्यंत लोकप्रिय है। हालांकि अब से करीब 95 साल पहले रूस के वैज्ञानिक इलिया इवानोविच ऐसे प्रयोग कर चुके हैं। इलिया ने दुनिया के जंतु विज्ञानियों से दावा किया था कि वे जल्द इंसान और चिम्पांजी के संयोग से 'ह्यूमैंजी' जीव बनाने जा रहे हैं। इलिया अपने प्रयोगों को अंजाम तक नहीं पहुचा पाए। लेकिन अब इस कल्पना को साकार करने के उपाय हो रहे हैं।

अब महाभारत में वर्णित देव व दानवों के संघर्ष के एक प्रसंग को देखते हैं। जब इंद्र ने छलपूर्वक रंभ नामक राक्षस की हत्या कर दी, तब शुक्राचार्य रंभ की मृत देह से वीर्य निकालकर एक भैंस में प्रत्यारोपित करते हैं। फलत: भैंस के सिर वाले महिषासुर दानव का जन्म हुआ। शुक्राचार्य यहीं नहीं रुके, उन्होंने महिषासुर की मृत्यु के बाद उसके वीर्य को हथिनी के गर्भ में रोप दिया। नतीजतन हथासुर राक्षस उत्पन्न हुआ।

(लेखक साहित्यकार हैं व मिथकों को वैज्ञानिक नजरिए से देखने में दक्षता रखते हैं)



source https://www.patrika.com/opinion/antiquity-and-science-humanyji-s-imagination-will-come-true-6817688/