पत्रिका न्यूज नेटवर्क
बलिया. सियासत कभी कुर्सी से नवाजती है तो कभी सिर्फ दर्द ही नहीं देती बल्कि दिल भी टूटता है। ऐसा ही हुआ बलिया के ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले जितेन्द्र सिंह उर्फ हाथी सिंह के साथ। उन्होंने पंचायत चुनाव के लिये ब्रह्मचर्य तोड़कर शादी रचायी (Man Married for UP Panchayat Election) और पत्नी को प्रधान पद का प्रत्याशी बनाया, लेकिन गांव की सत्ता पाने का अरमान-अरमान ही रह गया और हाथी सिंह की पत्नी चुनाव हार (wife Loss Election) गईं।
कहानी बलिया जिले के मुरली छपरा ब्लाॅक के शिवपुर कर्ण छपरा ग्राम पंचायत की है। यहां के जितेन्द्र सिंह उर्फ हाथी सिंह को गावं की सियासत का चस्का लगा तो उन्होंने 2015 में प्रधानी का चुनाव लड़ा। पर किस्मत ने साथ नहीं दिया और महज 57 वोटों से हार गए। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी और पांच साल तक खूब समाज सेवा की और गांव की सियासत पर पकड़ मजबूत बनाते रहे।
दिक्कत तब हो गई जब उनकी सीट इस बार महिलाओं के लिये आरक्षित हो गई। पर तैयारी पूरी थी और दोबारा मौका हाथ में लगे इसके लिये पांच साल इंतजार करना पड़ता। समर्थकों और कुछ करीबियों की सलाह पर ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले हाथी सिंह ने नामांकन से ठीक पहले बिना मुहूर्त के ही धर्मनाथजी मंदिर में निधि से शादी कर ली और नई नवेली दुल्हन का नामांकन करा दिया।
इसका पूरे इलाके में खूब चर्चा रही। हाथों की मेहंदी भी नहीं छूटी कि पत्नी निधि को लेकर हाथी सिंह प्रचार में कूद गए। लोगों ने आशीर्वाद तो दिया पर वोट देने में कंजूसी कर गए। रिजल्ट आया तो हाथी सिंह की पत्नी निधि 525 वोट पाकर हार गईं। प्रतिद्वन्द्वी हरि सिंह की पत्नी सोनिका देवी 564 वोट पाकर जीत गईं।
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