
चूरू. ये है एफ्रो एशियन सेंड स्नेक (सेमोफिश शोकरी) सांप। इसे स्थानीय भाषा में सटकल व जेवड़ी भी बोलते हैं। बहुत तेज गति से चलने के कारण इसकी फोटो बहुत मुश्किल से हो पाती है। शहर के चार युवाओं ने सुबह घूमने जाने के दौरान इसकी फोटो ली। लोहिया कॉलेज में बीएससी अंतिम वर्ष के छात्र भुवन गोपाल जमदग्नि ने बताया कि वह तीन दोस्ताें शुभम, अभिषेक व मृत्युंजय के साथ तारानगर रोड पर घूमने जाता है।
पशु-पक्षियों में विशेष रूचि होने के कारण कैमरा साथ लेकर जाते हैं। तीन जून को सुबह रोही में पशु-पक्षियों की फोटो ले रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों में से एक सांप तेजी से निकलकर आया। उसकी फोटो घर पर आकर पिता शिक्षाविद रविंद्रकुमार को दिखाई तो उन्होंने बताया कि यह सांप दुर्लभ प्रजातियों में माना जाता है।
दूसरे सांपों से बहुत ज्यादा तेज दौड़ता है
लोहिया कॉलेज के प्रो. केसी सोनी ने बताया कि हल्के पीले, गहरे भूरे रंग के इस सटकल की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह सांप पकड़े जाने पर अपना रंग बदल लेता है। पकड़े जाने पर रंग गहरा नीला हो जाता है, तीन दिन बाद वापस सामान्य हो जाता है। पूरे शरीर पर गिलहरी की तरह चार धारिया होती हैं। 10 से 12 फीट की लंबाई का यह सांप दिन में घूमता है और रात को झाड़ियों, धतूरे, नागफणी पर लटका रहता है।