- पर्यावरण को हो रहा नुकसान
-खनन पर रोक की उठाई मांग
प्रतापगढ़.
जिले में नदियों के किनारे अब खत्म होते जा रहे है। किनारों पर अवैध खनन जोरों पर है। चोरी-छुपे यहां से बजरी का खनन किया जा रहा है। ऐसे में नदियों के किनारे और चरनोट पर खोह बन गए है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी-नालों के किनारों और चरनोट से खनन को रुकवाने की मांग की है। जिले में कई स्थानों पर अवैध खनन अब भी जारी है। ऐसे में नदियों के किनारे और चरनोट पर खोह बन गए है। जिले में प्रमुख रूप से शिवना नदी के किनारों और पेटे में खनन हो रहा है। प्रमुख रूप से हथुनिया थाना इलाके में शिवना नदी में काफी खनन हो रहा है। यहां स्थिति यह है कि जेसीबी से खनन किया जा रहा है। मिट्टी और बजरी को पानी से धुलाई कर इसे ट्रैक्टरों और डम्पर में भरकर ले जाया जा रहा है। नदी में खनन करने पर यहां पानी में ही इसकी धुलाई की जाती है। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर पहुंचाई जा रही है।
रात में चलते है जेसीबी के पंजे
शिवना नदी के पेटे और पास में पड़ी चरनोट की जमीन में रात को जेसीबी से खनन किया जाता है। यहां चार जेसीबी और दर्जनों ट्रैक्टर इसमें लगे हुए है। रात को खनन होने से आसपास के लोगों को शंका नहीं होती है। इसके बाद ट्रैक्टर.ट्रॉलियों में भरकर यहां से बजरी ले जाई जा रही है।
काफी इलाकों में चरनोट पर खनन
शिवना नदी में सभी तरफ चोरी-छुपे खनन किया जा रहा है। लेकिन सन्नोटी, बिलेश्री के इलाके में अधिक खनन हो रहा है। यहां सन्नोटी के सौ बीघा के इलाके में चरनोट थी। जो खनन के बाद आधी भी नहीं बची है। इसके साथ ही बिलेश्री में 150 बीघा पर पौधरोपण किया गया था। लेकिन यहां खनन कर इसे खाह में तब्दील कर दी गई है।
खनन माफियाओं के सूचना तंत्र मजबूत
खनन कर रहे माफियाओं के सूचना तंत्र काफी मजबूत होते है। कई बार यहां खनन विभाग के कर्मचारी और पुलिस के पहुंचने से पहले ही सूचना पहुंच जाती है। ऐसे में जेसीबी और ट्रैक्टर को मौके से गायब कर दिए जाते है। लेकिन यहां खनन की जगह देखने पर अंदाजा लगाया जा सकता है।
राजस्थान समेत एमपी में जा रही बजरी
गौरतलब है कि शिवना नदी एमपी और राजस्थान की सीमा बनाती है। ऐसे में खनन के बाद बजरी के राजस्थान समेत एमपी में भी पहुंचाई जा रही है। इन इलाकों से कच्चे रास्तों से बजरी ले जाई जाती है।
लगानी चाहिए रोक
विभाग को ऐसे स्थानों पर रोक लगानी चाहिए। नदी, नालों और जंगल में किए जाने वाले अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। जिससे पर्यावरण बचाया जा सकेगा। अन्यथा इसके परिणाम हमें आगे भुगतने होंगे।
लक्ष्मणसिंह चिकलाड़,
पर्यावरणविद्
source https://www.patrika.com/pratapgarh-rajasthan-news/on-the-banks-of-rivers-ending-with-illegal-mining-6758858/