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बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

घूस लेते पकड़े गए एक्सईएन-रिटायर एईएन का तर्क मानें ताे हर साल 210 करोड़ बंटते हैं रिश्वत में, बिल सबमिट करने पर देनी होती है आधी राशि, चेक बनने पर पूरी

सड़क और बिल्डिंगों बनाने का काम करने वाले सार्वजनिक निर्माण विभाग हर साल प्रदेश में करीब 7 हजार करोड़ का काम करता है। इसमें बिल्डिंग और सड़क बनाने से लेकर बिल्डिंगाें की मरम्मत तक का काम शामिल है। गत दिनाें हुई भ्रष्‍टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्रवाई में एईएन के खुलासा के हिसाब से 7 हजार करोड़ में से हर साल 3 प्रतिशत के हिसाब से 210 करोड़ रुपए तो अफसरों को रिश्वत में ही बंट जाता है।

इतना नहीं यह तो एईएन का खुलासा है। ठेकेदारों के अनुसार 8 प्रतिशत राशि उन्हें रिश्वत के रूप में हर बिल पर देनी होती है। इसमें नीचे से लेकर आला अफसर तक शामिल है। इस हिसाब से तो 560 करोड़ रुपए अफसरों में रिश्वत के रूप में चला जाता है। इसके बाद ठेकेदार भी कमाते हाेंगे। ऐसे में प्रदेश में बन रही सड़कों और बिल्डिंगों की क्वालिटी पर सवाल खड़ा हो गया है कि इतनी राशि रिश्वत में चली जाती है तो ठेकेदार क्या क्वालिटी मेंटेन करते हाेंगे?

सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार सड़कों में

  • 7000 करोड़ में से 350 करोड़ रुपए तो सड़कों की मरम्मत में खर्च होते हैं।
  • 1000 करोड़ रुपए विभिन्न विभागों से बिल्डिंग बनाने, उनकी रिपेयरिंग करने के लिए आता है।
  • 5000 करोड़ रुपए की सड़कें हर साल बनती हैं।

ठेकेदार बिल पास कराने को रिश्वत मांगते हैं, इस तरह होता है 8 प्रतिशत का बंटवारा
ठेकेदार एसोसिएशन के तहत न्यूनतम 8 प्रतिशत राशि रिश्वत में चली जाती है। इसके अतिरिक्त कई अफसर 10 प्रतिशत मांग लेते हैं। 8 प्रतिशत में से एईएन, जेईएन, एक्सईएन का दो-दो प्रतिशत होता है। 2 प्रतिशत में कैशियर, बाबू और एकाउंटेंट शामिल है। एईएन-जेईएन और एक्सईएन के 6 प्रतिशत में से आला अफसरों तक भी पहुंचता है।

राशि नहीं देने पर अटका देते हैं फाइल
ठेकेदारों ने बताया काम करने के बाद बिल समिट करते है तो आधी राशि पहले देनी होती है। इसके बाद बिलों की फाइल आगे बढ़ती है। राशि नहीं देने पर फाइल में कमियां निकाल कर अटका दी जाती है। बिल पास होने पर चैक बनने पर पूरी राशि देनी होती है। कई अफसर और कर्मचारी विश्वास पर दे भी देते हैं।

सड़काें को चाैड़ा किया जा रहा है

  • विभाग काे वेतन के अतिरिक्त 6 हजार कराेड़ रुपए का बजट स्वीकृत है। इस बजट से सड़कें बनाने, मरम्मत करने, पेच वर्क सहित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़काें को चाैड़ा किया जा रहा है। इसमें से 350 कराेड़ रुपए से ताे प्रदेश में बारिश में क्षतिग्रस्त हुई सड़काें की मरम्मत की जाएगी। - संजीव माथुर, चीफ इंजीनियर

सिस्टम ऐसा नहीं

  • एक व्यक्ति भ्रष्टाचार कर रहा है ताे यह जरूरी नहीं की पूरे डिपार्टमेंट के अफसर ऐसा कर रहे हाे। ऐसा काेई सरकारी सिस्टम हाेता है क्या? यह ताे गलत बात है। - संदीप माथुर, चीफ इंजीनियर बिल्डिंग


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सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार सड़कों में